बाड़मेर। विश्व स्तनपान सप्ताह 1 से 7 अगस्त के तहत यूपीएचसी महावीर नगर में आम जन जागरूकता के सप्ताह का आयोजन किया गया। जिला अस्पताल आंचल मदर मिल्क बैक डोनर प्रभारी मंजू भाटी ने जानकारी देते हुए बताया की मदर मिल्क बैंक का संचालन ब्लड बैंक की तर्ज पर किया जाता है। इसमें दूध दान के लिए माताओं को प्रेरित कर उनका दूध स्टोरेज किया जाता है। इलेक्ट्रिक पंप की सहायता से दूध निकालकर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद हर डिब्बे से एक मिलीलीटर दूध का नमूना माइक्रोलैब में टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है। दूध की सही रिपोर्ट आने पर इसे शून्य से 20 डिग्री नीचे के तापमान पर बर्फ के गोले के रूप में बैंक के फ्रीजर में संग्रहित कर लिया जाता है। इस स्थिति में यह छह महीने तक प्रयोग किया जा सकता है। जब इसे किसी शिशु को पिलाना होता है तो उसे गर्म पानी में पतलाकर नली या चम्मच के सहारे पिला दिया जाता है। एक बार तरल रूप में आने पर यह अधिकतम चार घंटों तक ही उपयोगी होता है। पब्लिक हैल्थ मेनेजर मूलशंकर दवे ने जानकारी दी की शिशु के लिए मां के दूध से अधिक पौष्टिक और कुछ नहीं होता है। इसमें पानी, फैट, कार्बोहाइड्रेट, खनिज पदार्थ, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम और विटामिन ए, सी एवं डी होता है। शिशु के लिए इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए पोषण का यही एकमात्र जरिया है। यह बच्चें को खतरनाक वायरल संक्रमणों से दूर रखता है। महिलाओं को शिशु के जन्म के बाद 6 महीने तक माॅ का दूध पिलाना चाहिए। डाॅ पन्नाराम ने बताया की माॅ का दूध नवजात के लिये अमृत संजिवनी है यह दूर्घटना का शिकार हुए किसी व्यक्ति को रक्त दान जैसा ही है जिसे उसे तत्काल जरूरत पडती है। इस अवसर पर मिल्क रूम प्रभारी मनु बाला,स्टाॅफ नर्स चन्द्रसिह बेनिवाल, रेखा शर्मा एसीडीईओ नरेन्द्र चैधरी ,एएनएम मीना ,कोविड सहायक प्रकाश कुमार एवं आशा सहयोगिनीयाॅ मौजुद रही।
माॅ का दूध नवजात के लिये अमृत के समान: मंजू भाटी
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August 03, 2021
बाड़मेर। विश्व स्तनपान सप्ताह 1 से 7 अगस्त के तहत यूपीएचसी महावीर नगर में आम जन जागरूकता के सप्ताह का आयोजन किया गया। जिला अस्पताल आंचल मदर मिल्क बैक डोनर प्रभारी मंजू भाटी ने जानकारी देते हुए बताया की मदर मिल्क बैंक का संचालन ब्लड बैंक की तर्ज पर किया जाता है। इसमें दूध दान के लिए माताओं को प्रेरित कर उनका दूध स्टोरेज किया जाता है। इलेक्ट्रिक पंप की सहायता से दूध निकालकर 30 मिनट तक पॉश्च्युराइज करने के बाद 4 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद हर डिब्बे से एक मिलीलीटर दूध का नमूना माइक्रोलैब में टेस्टिंग के लिए भेजा जाता है। दूध की सही रिपोर्ट आने पर इसे शून्य से 20 डिग्री नीचे के तापमान पर बर्फ के गोले के रूप में बैंक के फ्रीजर में संग्रहित कर लिया जाता है। इस स्थिति में यह छह महीने तक प्रयोग किया जा सकता है। जब इसे किसी शिशु को पिलाना होता है तो उसे गर्म पानी में पतलाकर नली या चम्मच के सहारे पिला दिया जाता है। एक बार तरल रूप में आने पर यह अधिकतम चार घंटों तक ही उपयोगी होता है। पब्लिक हैल्थ मेनेजर मूलशंकर दवे ने जानकारी दी की शिशु के लिए मां के दूध से अधिक पौष्टिक और कुछ नहीं होता है। इसमें पानी, फैट, कार्बोहाइड्रेट, खनिज पदार्थ, आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम और विटामिन ए, सी एवं डी होता है। शिशु के लिए इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए पोषण का यही एकमात्र जरिया है। यह बच्चें को खतरनाक वायरल संक्रमणों से दूर रखता है। महिलाओं को शिशु के जन्म के बाद 6 महीने तक माॅ का दूध पिलाना चाहिए। डाॅ पन्नाराम ने बताया की माॅ का दूध नवजात के लिये अमृत संजिवनी है यह दूर्घटना का शिकार हुए किसी व्यक्ति को रक्त दान जैसा ही है जिसे उसे तत्काल जरूरत पडती है। इस अवसर पर मिल्क रूम प्रभारी मनु बाला,स्टाॅफ नर्स चन्द्रसिह बेनिवाल, रेखा शर्मा एसीडीईओ नरेन्द्र चैधरी ,एएनएम मीना ,कोविड सहायक प्रकाश कुमार एवं आशा सहयोगिनीयाॅ मौजुद रही।
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