हणुत सिंह की बहादुरी को सलाम: भारत-पाक युद्ध के स्वर्णिम 50 साल पर विजय मशाल महावीर चक्र विजेता हणुत सिंह के पैतृक आवास पहुंची
1971 के युद्ध में पाक टैंक रेजिमेंट को किया था नेस्तनाबूत, शहीदों को किया याद
बालोतरा/जसोल। साल 1971 के युद्ध में भारत की गौरवशाली जीत की 50वीं वर्षगांठ को भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से स्वर्णिम विजय के रूप में मनाई जा रही है। पिछले साल 16 दिसम्बर को दिल्ली से शुरू हुई विजय मशाल बाड़मेर स्थित जालिपा कैंप होते हुए पाकिस्तान टैंक रेजिमेंट के दांत खट्टे करने वाले महावीर चक्र से सम्मानित स्व लेफ्टिनेंट हणुत सिंह के पैतृक गांव जसोल के तेमावास स्थित स्मारक पर पहुंची। पूना हॉर्स रेजिमेंट के हणुत सिंह ने भारत-पाक युद्ध के दौरान अपने अदम्य साहस परिचय दिया था। शुक्रवार को स्मारक पर पुष्पाजंलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्वांजलि दी गई। पूना हॉर्स के रिटायर्ड बिग्रेडियर करण सिंह ने ब्रिगेडियर सलिल सेठ, स्टेशन कमांडर जालिपा के साथ विजय मशाल की अगवानी की। हणुत सिंह के पैतृक गांव में स्वर्णिम 50 वर्ष पूर्ण होने पर सेना द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल पी एस मनहास ने किया अभिनंदन
कोणार्क कोर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पी एस मनहास ने सभी रैंकों की ओर से माल्यार्पण किया। कोर कमांडर ने स्वर्गीय लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह, रिसालदार हमीर सिंह और हवलदार शैतान सिंह के परिजनों और वीर नारियों बदल कुंवर पत्नी स्व शौर्य चक्र विजेता सार्जेंट जगमाल सिंह और थानी देवी पत्नी सिपाही नारायण राम का अभिनंदन किया। इस दौरान कोणार्क कोर के कोर कमांडर ने 1971 के युद्ध में वीरता से लडऩे वाले राजस्थान के सैनिकों की वीरता और बलिदान को याद किया। कोणार्क कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीएस मन्हास ने प्रसिद्ध आम्र्ड कोर यूनिट सैंट्रल इंडिया हॉर्स के कर्नल कमांडेंट की हैसियत से यूनिट के वयोवृद्ध पूर्व रक्षा मंत्री स्वर्गीय जसवंत सिंह के घर पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की।
जवानों के प्रति जताया आभार
कोणार्क कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीएस मन्हास ने अपने उद्बोधन में कहा कि मैं महावीर चक्र विजेता वीर सैनिक, वीर माताएं सभी को मैं अपनी कोर, भारतीय सेना और देश की तरफ से आपको शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। सदियों से दुश्मन आए और भागकर चले भी गए। उन्होने कहा कि 1971 की लड़ाई में पश्चिमी सीमा में लोंगेवाला, गडरा रोड़ सीटी, खोखरापार, इस्लामगढ़ में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के क्षेत्र में कब्जा कर लिया था।
पाक टैंक रेजिमेंट को किया था नेस्तनाबूत
ठाकुर नृपेन्द्र करणसिंह का कहना है कि लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह का जन्म बाड़मेर के जसोल गांव में हुआ था। सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने भारतीय सेना की 17 पूना हॉर्स की कमान संभाली। ले. जनरल सिंह ने 1971 की लड़ाई में अपनी वीरता का परिचय देते हुए पाकिस्तान की टैंक रेजिमेंट को धूल चटाई थी। इस लड़ाई में ले. जनरल सिंह ने पाकिस्तान की करीब ढाई टैंक रेजिमेंट को नष्ट किया था। इसके लिए उन्हें महावीर चक्र से भी नवाजा गया था। इन्होंने अपने अदम्य साहस का परिचय देकर पाकिस्तान टैंक रेजिमेंट के दांत खट्टे कर दिए थे।
16 दिसम्बर को दिल्ली से रवाना हुई विजय मशाल
स्वर्णिम विजय मशाल भारतीय सशस्त्र बलों के वीर सैनिकों के बलिदान का प्रतीक है। 1971 की लड़ाई में निर्णायक जीत हासिल करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और इसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ था। इन योद्धाओं के बलिदान को याद करने के लिए 16 दिसम्बर 2020 को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक दिल्ली से चार विजय मशाल प्रज्वलित की गई। सैनिकों को सम्मानित करने और बहादुर वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे देश में चारों दिशाओं में इन मशालों को ले जाया जा रहा है। एक वर्ष तक चलने वाला विजय दिवस कार्यक्रम 16 दिसंबर को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक दिल्ली में समाप्त होगा। गौरतलब है कि 16 दिसम्बर 1971 को भारतीय सेना ने एक वीरतापूर्ण और निर्णायक कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना को हराया था। इसके बाद बांग्लादेश का जन्म हुआ। इस जीत के कारण 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी भी परंपरागत युद्ध में संख्या सबसे ज्यादा थी।



