बायतु। न्याय वेदांत शिक्षण संस्थान,बायतु में आज विधिविधान तरीके से नवीन बटुकों का उपनयन संस्कार सम्पन्न हुआ। जिसमें दसविधि स्नान, ऋषि पूजन कर हवनादि किया गया। विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष भवानी शंकर गौड़ ने बताया कि भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों में यह सोढस संस्कारों में से एक है, जिसके सम्पन्न होने पर ही वेदाध्ययन का अधिकार मिलता है। विद्यालय व्यवस्थापक अशोक जोशी ने बताया कि आज के इस कलियुग में भी सतयुग के समय परम्परा के अनुरूप गुरुकुल पद्धति से विद्यालय में रहकर बटुक गुरुजी वेद पढते है तथा संस्कारों का अध्ययन एवं सृजन करते हैं। कोरोना महामारी के प्रकोप से जहां पूरे विश्व में भर व्याप्त है, उससे निजात दिलाने के लिए इस विद्यालय के अधीन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन विश्व में शान्ति स्थापना के लिए सम्पन्न हुए। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष भवानी शंकर गौड़, सचिव दमाराम गौड़, प्राचार्य हिमांशु पांड्या, व्यवस्थापक अशोक जोशी, गोविंद शर्मा, हनुमान गौड़ सहित प्रबंध समिति के साथ गणमान्य जन उपस्थित रहे तथा सभी यज्ञ में भी भाग लिया तथा बटुकों को यज्ञोपवीत धारण करवाया। पश्चिमी राजस्थान में वेदों के प्रचार-प्रसार एवं वेद ध्वनि का अलख जगाने के क्रम में बायतु के इस विद्यालय का विशेष स्थान है।
चतुर्थ उपनयन संस्कार सम्पन्न
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July 15, 2021
बायतु। न्याय वेदांत शिक्षण संस्थान,बायतु में आज विधिविधान तरीके से नवीन बटुकों का उपनयन संस्कार सम्पन्न हुआ। जिसमें दसविधि स्नान, ऋषि पूजन कर हवनादि किया गया। विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष भवानी शंकर गौड़ ने बताया कि भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों में यह सोढस संस्कारों में से एक है, जिसके सम्पन्न होने पर ही वेदाध्ययन का अधिकार मिलता है। विद्यालय व्यवस्थापक अशोक जोशी ने बताया कि आज के इस कलियुग में भी सतयुग के समय परम्परा के अनुरूप गुरुकुल पद्धति से विद्यालय में रहकर बटुक गुरुजी वेद पढते है तथा संस्कारों का अध्ययन एवं सृजन करते हैं। कोरोना महामारी के प्रकोप से जहां पूरे विश्व में भर व्याप्त है, उससे निजात दिलाने के लिए इस विद्यालय के अधीन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन विश्व में शान्ति स्थापना के लिए सम्पन्न हुए। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष भवानी शंकर गौड़, सचिव दमाराम गौड़, प्राचार्य हिमांशु पांड्या, व्यवस्थापक अशोक जोशी, गोविंद शर्मा, हनुमान गौड़ सहित प्रबंध समिति के साथ गणमान्य जन उपस्थित रहे तथा सभी यज्ञ में भी भाग लिया तथा बटुकों को यज्ञोपवीत धारण करवाया। पश्चिमी राजस्थान में वेदों के प्रचार-प्रसार एवं वेद ध्वनि का अलख जगाने के क्रम में बायतु के इस विद्यालय का विशेष स्थान है।
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