रक्षाबंधन का पर्व प्राणी मात्र की रक्षा और सद्भाव का प्रतीक: गणपत बांठिया

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बालोतरा। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य गणपत बांठिया ( Ganpat Banthia ) ने रक्षा बंधन का पर्व कच्ची बस्तियों एवं ग्रामीणों के साथ प्रेम व भाईचारें के साथ मनाया। गणपत बांठिया  ( Ganpat Banthia )ने बताया कि प्रात: वेला में विवेकानंद शाखा में प्रार्थना कर स्वयं सेवकों के साथ रक्षा सूत्र बांधकर सद्भाव का संदेश दिया। स्वयं सेवकों के साथ सेवा बस्ती में जाकर रक्ष सूत्र बांधकर आपसी प्रेम व भाईचारें का संदेश देते हुए रक्षाबंधन के पावन पर्व की बधाईयां दी। कुड़ी गांव में जंभेश्वर भगवान की शब्दवाणी कथा का श्रवण कर ग्रामीणों को रक्षा सूत्र का धागा बांधकर मैत्री भाव एवं प्राणी मात्र की रक्षा का संकल्प लिया।  ( Ganpat Banthia )बांठिया ने कहा कि यह पर्व सांप्रदायिकता और वर्ग-जाति की दिवार को गिराने में भी मुख्य भूमिका अदा करता है। इस मौके पर कुड़ी सरपंच मानाराम ने कहा कि भाई बहन के निश्चल प्रेम का त्यौहार रक्षाबंधन भाईचारें व सद्भाव प्रतीक भी है। ठाकुर आवड़दान चारण ने कहा कि रक्षाबंधन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबंधन पर्व सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता या एकसूत्रता का सांस्कृतिक उपाय रहा है। सामाजिक महत्ता के साथ ही पौराणिक कथाओं, महाभारत के अतिरिक्त ऐतिहासिक और साहित्यिक कई प्रसंग मिलते हैं। इस अवसर पर भाजयुमों अध्यक्ष महिपालसिंह करणौत, अरूण सालेचा, प्रवीण, बजरंगसिंह, उप सरपंच गोपाराम, डॉ एनआर विश्नोई, समाजसेवी रामलाल विश्नोई, हड़मान विश्नोई, रणवीर विश्नोई, बिशनसिंह राजपुरोहित, दिलीप चारण, कैलाश प्रजापत सहित ग्रामीणों ने भी एक दूसरें को रक्षा सूत्र बांधकर सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। 


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