बालोतरा। बाड़मेर जिले में पॉजिटिव मरीजों के 15 रैंडम सैंपल भेजे थे, इसमें 2 कप्पा वेरिएंट के मरीज आए सामने, 2 अल्फा और 8 डेल्टा से संक्रमित भी मिले है। मेडिकल कॉलेज के माइक्र बायॉलाजी विभाग की ओर से जीनोम सिक्वेसिंग के लिए आईजीआईबी लैब दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के रैंडम 15 सैंपल अप्रैल में भेजे गए। इन सैंपलों में लैब की रिपोर्ट के आधार पर 2 कप्पा वेरिएंट के मरीज पाए गए है। यह दोनों मरीज बालोतरा शहर के रहने वाले है। एक मरीज मालियों का वास तथा दूसरा वार्ड नंबर 8 का है। रिपोर्ट के आधार पर 2 मरीज अल्फा वेरिएंट के सामने आए है। वहीं, 8 मरीज डेल्टा वेरिएंट के मिले है। यह मरीज बाड़मेर शहर की रॉय कॉलोनी, एमपीटी नागाणा, चवा, सरनू, बांड से मिले है। पीएमओ डॉ बी एल मंसूरिया ने बताया कि जीनोम सिक्वेसिंग के लिए जून माह में जनवरी, फरवरी, मार्च व अप्रैल के मरीजों के सैंपल भेजे गए थे। इनमे से अप्रैल में आरटीपीसीआर पॉजिटिव मरीजों की रिपोर्ट आई है। माइक्रो बॉयलोजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाँ मोतीलाल खत्री ने बताया कि मई माह के 15 आरटीपीसीआर मरीजों के सैंपल जुलाई में भेजे गए है, इनकी रिपोर्ट आना बाकी है। दिल्ली लैब से रिपोर्ट आने में कम से कम डेढ माह का समय लगता है। जीनोम सिक्वेंसिंग में वायरस की मॉलिक्यूलर लेवल पर जांच कर निकल्यूटाइड निकालकर वायरस की प्रकृति का पता लगाया जाता है। कोरोना वायरस के फिलहाल अल्फा, डेल्टा वेरिएंट और कप्पा वेरिएंट ही सामने आए है।
कोरोना का नया वेरिएंट: अल्फा व कप्पा के 2-2 और डेल्टा के 8 संक्रमित केस आए सामने
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July 15, 2021
बालोतरा। बाड़मेर जिले में पॉजिटिव मरीजों के 15 रैंडम सैंपल भेजे थे, इसमें 2 कप्पा वेरिएंट के मरीज आए सामने, 2 अल्फा और 8 डेल्टा से संक्रमित भी मिले है। मेडिकल कॉलेज के माइक्र बायॉलाजी विभाग की ओर से जीनोम सिक्वेसिंग के लिए आईजीआईबी लैब दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव मरीजों के रैंडम 15 सैंपल अप्रैल में भेजे गए। इन सैंपलों में लैब की रिपोर्ट के आधार पर 2 कप्पा वेरिएंट के मरीज पाए गए है। यह दोनों मरीज बालोतरा शहर के रहने वाले है। एक मरीज मालियों का वास तथा दूसरा वार्ड नंबर 8 का है। रिपोर्ट के आधार पर 2 मरीज अल्फा वेरिएंट के सामने आए है। वहीं, 8 मरीज डेल्टा वेरिएंट के मिले है। यह मरीज बाड़मेर शहर की रॉय कॉलोनी, एमपीटी नागाणा, चवा, सरनू, बांड से मिले है। पीएमओ डॉ बी एल मंसूरिया ने बताया कि जीनोम सिक्वेसिंग के लिए जून माह में जनवरी, फरवरी, मार्च व अप्रैल के मरीजों के सैंपल भेजे गए थे। इनमे से अप्रैल में आरटीपीसीआर पॉजिटिव मरीजों की रिपोर्ट आई है। माइक्रो बॉयलोजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डाँ मोतीलाल खत्री ने बताया कि मई माह के 15 आरटीपीसीआर मरीजों के सैंपल जुलाई में भेजे गए है, इनकी रिपोर्ट आना बाकी है। दिल्ली लैब से रिपोर्ट आने में कम से कम डेढ माह का समय लगता है। जीनोम सिक्वेंसिंग में वायरस की मॉलिक्यूलर लेवल पर जांच कर निकल्यूटाइड निकालकर वायरस की प्रकृति का पता लगाया जाता है। कोरोना वायरस के फिलहाल अल्फा, डेल्टा वेरिएंट और कप्पा वेरिएंट ही सामने आए है।
