बालोतरा। आर्य समाज गांधीपुरा, आर्य वीर दल, बालोतरा के तत्वावधान में यूजीसी द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती की उपेक्षा यथा 19 एवं 20 शताब्दी के प्रमुख दार्शनिकों में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम सम्मिलित नहीं किया गया जिसको लेकर लेकर प्रधानमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी बालोतरा नरेश सोनी को ज्ञापन सौंपा। आर्य समाज गांधीपुरा के मंत्री आर्य जितेन्द्र ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दर्शन का नया पाठ्यक्रम अपनी वेबसाईट पर कुछ समय पूर्व अपलोड किया है। इस पाठ्यक्रम की इकाई-5(ट) में समकालीन 19वीं एवं 20वीं शताब्दी के दार्शनिकों के जो नाम अपलोड किये गये हैं उनमें स्वामी विवेकानन्द, श्री अरविन्द, महात्मा गांधी सहित 15 लोगों के नाम लिखे गये हैं जिनमें स्वामी दयानन्द सरस्वती जी का नाम नहीं है। जबकि वे समकालीन भारतीय दर्शन के शिखर पुरुष थे। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने सत्यार्थ प्रकाश एवं वेद भाष्य जैसी रचनाओं के द्वारा अपने उच्च दार्शनिकता एवं पाण्डित्य का परिचय दिया हुआ है। उसके बावजूद समकालीन दार्शनिकों की सूची में उनका नाम सम्मिलित न करना हास्यास्पद लगता है। जबकि हम सभी को सर्वविदित है कि जिन दार्शनिकों के नाम इस सूची में अपलोड किये गये हैं, इनमें से अधिकांश पर महर्षि दयानन्द सरस्वती का विशेष प्रभाव रहा है। वरिष्ठ आर्य वीर गोविंदराम परिहार ने कहा कि इससे आर्य समाज संगठन एवं महर्षि दयानन्द सरस्वती के अनुयायियों में असंतोष एवं आक्रोश है। इस दौरान राजेंद्र गहलोत, मांगीलाल पंवार, सवाई आर्य, कोषाध्यक्ष नरेश पंवार, बाबूलाल परमार ,जीवराज आर्य, दिनेश सोलंकी, महेंद्र सुंदेशा, नरेंद्र परिहार, जितेंद्र परिहार, सुरेश सैनी सहित आर्य जन उपस्थित थे।
प्रमुख दार्शनिकों में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम शामिल करने की मांग
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July 13, 2021
बालोतरा। आर्य समाज गांधीपुरा, आर्य वीर दल, बालोतरा के तत्वावधान में यूजीसी द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती की उपेक्षा यथा 19 एवं 20 शताब्दी के प्रमुख दार्शनिकों में स्वामी दयानंद सरस्वती का नाम सम्मिलित नहीं किया गया जिसको लेकर लेकर प्रधानमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी बालोतरा नरेश सोनी को ज्ञापन सौंपा। आर्य समाज गांधीपुरा के मंत्री आर्य जितेन्द्र ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने दर्शन का नया पाठ्यक्रम अपनी वेबसाईट पर कुछ समय पूर्व अपलोड किया है। इस पाठ्यक्रम की इकाई-5(ट) में समकालीन 19वीं एवं 20वीं शताब्दी के दार्शनिकों के जो नाम अपलोड किये गये हैं उनमें स्वामी विवेकानन्द, श्री अरविन्द, महात्मा गांधी सहित 15 लोगों के नाम लिखे गये हैं जिनमें स्वामी दयानन्द सरस्वती जी का नाम नहीं है। जबकि वे समकालीन भारतीय दर्शन के शिखर पुरुष थे। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने सत्यार्थ प्रकाश एवं वेद भाष्य जैसी रचनाओं के द्वारा अपने उच्च दार्शनिकता एवं पाण्डित्य का परिचय दिया हुआ है। उसके बावजूद समकालीन दार्शनिकों की सूची में उनका नाम सम्मिलित न करना हास्यास्पद लगता है। जबकि हम सभी को सर्वविदित है कि जिन दार्शनिकों के नाम इस सूची में अपलोड किये गये हैं, इनमें से अधिकांश पर महर्षि दयानन्द सरस्वती का विशेष प्रभाव रहा है। वरिष्ठ आर्य वीर गोविंदराम परिहार ने कहा कि इससे आर्य समाज संगठन एवं महर्षि दयानन्द सरस्वती के अनुयायियों में असंतोष एवं आक्रोश है। इस दौरान राजेंद्र गहलोत, मांगीलाल पंवार, सवाई आर्य, कोषाध्यक्ष नरेश पंवार, बाबूलाल परमार ,जीवराज आर्य, दिनेश सोलंकी, महेंद्र सुंदेशा, नरेंद्र परिहार, जितेंद्र परिहार, सुरेश सैनी सहित आर्य जन उपस्थित थे।
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