बालोतरा। साध्वीश्री मंजुयशा जी के सान्निध्य में तेरापंथी सभा के तत्वावधान में श्री गौतमचंद गोगड़ के मासखमण की तपस्या पर तप अनुमोदना का कार्यक्रम न्यू तेरापंथ भवन में समायोजित हुआ। साध्वी मंजुयशाजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा जैन धर्म में तपस्या का महत्वपूर्ण स्थान है। तप के प्रभाव से मनुष्य अचिन्त्य शक्तियों और लब्धियों को प्राप्त कर लेता है। भगवान महावीर ने इसे कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ साधन बताया है। स्वयं भगवान महावीर ने लम्बे समय तक तपस्या के द्वारा स्वयं को साधा और आध्यात्म की अतुल गहराई में छिपी आनंद की मुक्ताओं को प्राप्त किया। तपस्या के द्वारा जहां कर्मों की महान निर्जरा होती है, वही अनेक व्याधियों से भी छुटकारा मिल जाता है। हमारे भीतर जमे हुए विजातीय तत्व को तपस्या के द्वारा आसानी से बाहर निकाला जा सकता है। तेयुप मंत्री नवीन सालेचा ने बताया कि गौतमचन्द गोगड़ ने मासखमण कर नए इतिहास का सृजन किया है। सुदृढ़ मनोबल वाला व्यक्ति ही तपस्या के क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है। तपस्या में शरीरबल से ज्यादा मनोबल एवं संकल्पबल काम करता है। परिवार के सहयोग एवं गुरुकृपा से आज इनका संकल्प फलवान बना है। इस अवसर पर साध्वीश्री इन्दुप्रभा जी के अ_ाइ तप की अनुमोदना की गई। भंसाली परिवार की बहुओं ने सुमधुर गीत के द्वारा अपने भाव प्रकट किए। इस अवसर पर पारस जी सालेचा, सपना डागा, शिल्पा छाजेड़, दिव्यांशी भंसाली, हंसमुख गोगड़, हर्षा छाजेड़ और सरस्वती देवी श्रीश्रीमाल के अ_ाइ तप का अनुमोदन किया। इस अवसर पर गोगड़ परिवार, भंसाली परिवार और महिला मंडल ने तप अनुमोदना गीत का संगान किया। कन्या मंडल ने परिसंवाद की प्रस्तुति दी। तेरापंथ सभा अध्यक्ष धनराज ओस्तवाल और तेयुप अध्यक्ष संदीप ओस्तवाल ने क्रमश महासती साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी और साध्वीश्री अपूर्वयशाजी के संदेशों का वाचन किया। महावीर चोपड़ा और प्रवीण भंसाली ने वक्तव्य के द्वारा तप की अनुमोदना की। मंच संचालन साध्वीश्री चिन्मयप्रभा जी ने किया। गौतमचन्द गोगड़ का मोमेंटो और शाल्यपर्ण द्वारा बहुमान तेरापंथ सभा द्वारा किया गया। इस अवसर पर तेरापंथ समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए।
तपस्या कर्म निर्जरा का उत्तम साधन है: साध्वीश्री मंजुयशा जी
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August 23, 2021
बालोतरा। साध्वीश्री मंजुयशा जी के सान्निध्य में तेरापंथी सभा के तत्वावधान में श्री गौतमचंद गोगड़ के मासखमण की तपस्या पर तप अनुमोदना का कार्यक्रम न्यू तेरापंथ भवन में समायोजित हुआ। साध्वी मंजुयशाजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा जैन धर्म में तपस्या का महत्वपूर्ण स्थान है। तप के प्रभाव से मनुष्य अचिन्त्य शक्तियों और लब्धियों को प्राप्त कर लेता है। भगवान महावीर ने इसे कर्म निर्जरा का श्रेष्ठ साधन बताया है। स्वयं भगवान महावीर ने लम्बे समय तक तपस्या के द्वारा स्वयं को साधा और आध्यात्म की अतुल गहराई में छिपी आनंद की मुक्ताओं को प्राप्त किया। तपस्या के द्वारा जहां कर्मों की महान निर्जरा होती है, वही अनेक व्याधियों से भी छुटकारा मिल जाता है। हमारे भीतर जमे हुए विजातीय तत्व को तपस्या के द्वारा आसानी से बाहर निकाला जा सकता है। तेयुप मंत्री नवीन सालेचा ने बताया कि गौतमचन्द गोगड़ ने मासखमण कर नए इतिहास का सृजन किया है। सुदृढ़ मनोबल वाला व्यक्ति ही तपस्या के क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है। तपस्या में शरीरबल से ज्यादा मनोबल एवं संकल्पबल काम करता है। परिवार के सहयोग एवं गुरुकृपा से आज इनका संकल्प फलवान बना है। इस अवसर पर साध्वीश्री इन्दुप्रभा जी के अ_ाइ तप की अनुमोदना की गई। भंसाली परिवार की बहुओं ने सुमधुर गीत के द्वारा अपने भाव प्रकट किए। इस अवसर पर पारस जी सालेचा, सपना डागा, शिल्पा छाजेड़, दिव्यांशी भंसाली, हंसमुख गोगड़, हर्षा छाजेड़ और सरस्वती देवी श्रीश्रीमाल के अ_ाइ तप का अनुमोदन किया। इस अवसर पर गोगड़ परिवार, भंसाली परिवार और महिला मंडल ने तप अनुमोदना गीत का संगान किया। कन्या मंडल ने परिसंवाद की प्रस्तुति दी। तेरापंथ सभा अध्यक्ष धनराज ओस्तवाल और तेयुप अध्यक्ष संदीप ओस्तवाल ने क्रमश महासती साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी और साध्वीश्री अपूर्वयशाजी के संदेशों का वाचन किया। महावीर चोपड़ा और प्रवीण भंसाली ने वक्तव्य के द्वारा तप की अनुमोदना की। मंच संचालन साध्वीश्री चिन्मयप्रभा जी ने किया। गौतमचन्द गोगड़ का मोमेंटो और शाल्यपर्ण द्वारा बहुमान तेरापंथ सभा द्वारा किया गया। इस अवसर पर तेरापंथ समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित हुए।
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